शिवगढ़/रायबरेली: श्रीबनवारी वीर बाबा का ऐतिहासिक 38वां भण्डारा बुधवार 6 जनवरी 2021 को क्षेत्र के पिपरी ग्राम पंचायत में स्थित श्रीबनवारी बीर बाबा की तपोभूमि पर गत वर्षो की भांति आयोजन किया जाएगा। निवर्तमान प्रधान अनुपमा तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि, भंडारे की समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
आपको बता दें कि, इस इस आश्रम से लोगों की अटूट आस्था जुड़ी हुई है, यही कारण है कि, भंडारे में क्षेत्र की अपार जनता यहां पहुंच कर स्वेच्छा से दान पुण्य के साथ-साथ भोजन प्रसाद भी ग्रहण करते हैं। पूर्व प्रधान पिपरी पंडित नंदकिशोर तिवारी ने बताया कि, 1983 से आश्रम के महंत श्री बनवारी बाबा के निधन पर अनवरत विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी बनवारी वीर बाबा की तपोभूमि पर हजारों श्रद्धालु प्रतिवर्ष वार्षिक भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते हैं।
शिवगढ़ क्षेत्र के पिपरी गांव में स्थित बनवारी वीर बाबा की कुटी सैकड़ों वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर तिवारी ने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि, बाबा की कुटी के स्थान पर कभी बहुत घना जंगल हुआ करता था। जहां घने जंगल के अन्दर ब्रह्मचारी बनवारी बाबा तप किया करते थे। वहीं ग्राम प्रधान ढकवा राजबहादुर सिंह व बुजुर्ग रमेश चंद्र त्रिवेदी ने बताया कि, बनवारी बाबा की सबसे बड़ी खास बात थी कि, बनवारी वीर बाबा एक दिन में सिर्फ एक व्यक्ति से ही सीधा लेते थे, उसके बाद जितने भी भक्तगण सीधा लेकर आते थे, सभी का सीधा वापस कर देते थे, और उस सीधे से बनाए गए भोजन से कुटी में आने वाले श्रद्धालुओं को भरपेट भोजन कराते थे।
सभी का कहना है कि, भक्तों की संख्या चाहे जितनी हो जाए, उस एक सीधे से बनाया गया भोजन कभी कम नहीं पड़ता था। क्षेत्र के राकेश बाबू तिवारी व उदयप्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि, एक बार बनवारी वीर बाबा अपने किसी भक्तों के यहां चले गए थे। तभी रात में उन्हें स्वप्न आया की एक चोर मंदिर में चोरी कर रहा है। भक्तों के लाख मना करने के बाद भी बनवारी बाबा ने रात में ही कुटी के लिए प्रस्थान कर दिया। पैदल कुटी पहुंचे बनवारी बाबा ने देखा कि, एक चोर मंदिर में बंधे घंटे से चिपका हुआ है। बाबा को देखकर चोर मिन्नतें करने लगा। दयालु स्वभाव के बनवारी वीर बाबा के क्षमा करने के बाद चोर घंटे से छूट गया, और बाबा के चरणों में गिर पड़ा। चोर ने उसी क्षण संकल्प किया कि, उस दिन के बाद कभी चोरी नहीं करेगा। बाद में वह चोर बाबा का अनन्य भक्त बन गया।


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