किसान आंदोलन में शामिल किसान ने क्यों लगाई फांसी, जानिए पूरा मामला

 

नई दिल्ली: तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद कराने की मांग को लेकर सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों का धरना-प्रदर्शन शनिवार को 38वें दिन में प्रवेश कर गया। सिंघु के साथ टीकरी और दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर भी बढ़ी संख्या में किसान तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। वहीं, कृषि कानूनों को लेकर यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन में प्रदेश के रामपुर जनपद के बिलासपुर निवासी कश्मीर सिंह ने गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।  मृतक किसान के पास से एक सुसाइड नोट मिला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह सुसाइड नोट पंजाबी में लिखा है जिसका अनुवाद कराया जा रहा है।

    आपको बता दें कि, जानकारी के मुताबिक, इसमें उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त करने के पीछे सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। किसान के मौत की खबर पर आंदोलन स्थल के किसानों में शोक है। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई है। वहीं किसान संगठनों ने आंदोलन स्थल के मंच से मृतक किसान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कश्मीर ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि, मेरा अंतिम संस्कार मेरे पोते-बच्चे के हाथों यहीं दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर होना चाहिए। उनका परिवार बेटा-पोता यहीं आंदोलन में निरंतर सेवा कर रहे हैं। यूपी पुलिस ने अब सुसाइड नोट अपने कब्जे में ले लिया है। कश्मीर सिंह ने अपनी आत्महत्या के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने लिखा है कि, आखिर हम कब तक यहां सर्दी में बैठे रहेंगे।इसका कारण आंदोलन के मद्देनजर इस सरकार को फेल होना बताया है, और कहा है कि, यह सरकार सुन नहीं रही है, इसलिए अपनी जान देकर जा रहा हूं।

     तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की जिद पर अड़े सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों का धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। हालांकि नव वर्ष के आगमन का न तो किसानों में कोई उत्साह दिखा और न ही धरना स्थल पर भीड़ ही नजर आई। यहां घूमने-फिरने के मकसद से आने वाले लोगों की आवाजाही तो रही, लेकिन उनकी भी तादाद कम ही दिखी। लोगों की कमी के कारण दिनभर चलने वाले लंगर दोपहर में ही बंद कर दिए गए। किसान नेताओं ने पंजाब व हरियाणा के लोगों से आह्वान किया था कि, वह नए साल में सिंघु बार्डर पर आकर आंदोलन का समर्थन करें। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही थी कि एक जनवरी को यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। लेकिन, उम्मीद के विपरीत शुक्रवार को कम बेहद कम संख्या में लोग पहुंचे। बता दें कि, किसान संगठन सिघु बार्डर पर पिछले एक माह से ज्यादा समय से डटे हुए हैं।

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