आरक्षण सूची में धांधली करवाने वालों के मंसूबों पर फिर सकता है पानी, शिकायत कर्ताओं के चेहरे पर लौट सकती है मुस्कान।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: आगामी त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के लिए तय किए गए आरक्षण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा एक याचिका की सुनवाई के दौरान आरक्षण की अंतिम सूची प्रकाशित करने पर सरकार को रोक लगाने के निर्देश दिए जाने के बाद अब क्षेत्र में राजनैतिक हलकों में उहापोह की स्थिति पैदा हो गई है। एक ओर जहां मन मुताबिक आरक्षण तय हो जाने से गदगद प्रत्याशियों में संशय की स्थिति पैदा हो गई है, वहीं दूसरी ओर आरक्षण कराने में कथित रूप से हुई धांधली का आरोप लगाकर आपत्ति दाखिल करने वाले लोगों में आशा की एक नई किरण जग गई है। लोग सकते में है कि, कहीं उच्चन्यायालय अपने फैसले में घोषित किए गए आरक्षण को रद्द कर, नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण करने की बात ना कह दे। इस आशंका को लेकर बड़ी तादाद में पंचायती चुनाव लड़ने और लड़ाने के इच्छुक लोगों में अफरा तफरी मच गई है। फिलहाल चल रहे चुनाव संपर्क अभियान में विराम सा लगता प्रतीत हो रहा है।

      आपको बता दें कि, जिस दिन से आरक्षण तय करने का फॉर्मूला सरकार ने तय किया था, उसी दिन से गांव गलियारों के राजनीतिक पंडितों द्वारा आरक्षण किस गांव के किस पद पर क्या आरक्षण होगा, इसकी अटकले लगाई जाने लगी थी। यह सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक की आरक्षण की सूची सार्वजनिक नहीं कर दी गई।

    इसी क्रम में जब आरक्षण सूची सार्वजनिक हो गई, तो इच्छा के विपरीत आरक्षण तय होने पर विरोध का सिलसिला जारी हो गया। ब्लॉक क्षेत्र के मोन, पूरे अचली, जमुरांवा, नारायणपुर, ज्योना, अतरेहटा, अलीपुर सहित लगभग 1 दर्जन से अधिक गांव से बड़ी तादात में लोगों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर अधिकारियों से सांठगांठ करके मन मुताबिक आरक्षण तय कराने का आरोप लगाया, और विशेषकर ग्राम प्रधान पद के आरक्षण को रद्द कराकर नए सिरे से आरक्षण तय करने की मांग करते हुए आपत्तियां प्रस्तुत की थी। यही नहीं ब्लॉक प्रमुख पद के आरक्षण में भी स्थापित नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए फिर से आरक्षण प्रक्रिया के द्वारा प्रमुखी का पद आरक्षित करने की मांग की गई थी।

    गांवों में आरक्षण को लेकर सुबह से शाम तक आरोप प्रत्यारोपों का दौर चलता रहता था, लेकिन विगत दिनों उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दो वरिष्ठ जजों की खंडपीठ ने आरक्षण तय करने के शासनादेश को दरकिनार कर 1995 में की गई आरक्षण व्यवस्था को आधार बनाकर सरकार द्वारा 2021 में पंचायती चुनाव के लिए आरक्षण व्यवस्था तय की गई थी। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया जनहित याचिका दाखिल करने वाले के अधिवक्ता द्वारा रखी गई दलीलों को सुनवाई हेतु स्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि, 15 मार्च तक आरक्षण की घोषणा को रोक दिया जाए। 15 मार्च 2021 को कोर्ट ने आगामी सुनवाई के लिए तय किया है। अब देखना यह है कि, अग्रिम 15 मार्च दिन सोमवार को आगे कोर्ट क्या रुख अपनाता है। फिर हाल अधिकतर लोग तय किए गए वर्तमान आरक्षण को रद्द करके नए सिरे से आरक्षण तय करने की मांग कर रहे हैं।

   इसका असर ग्रामीण इलाकों में साफ दिख रहा है। जबकि तय किए गए आरक्षण के मुताबिक जिन जिन गांवों में आरक्षण लगभग तय माना जा चुका था, वहां पर संभावित प्रत्याशी और उनके समर्थकों द्वारा दिन और रात की जा रही कन्वेंशी कमी देखने को मिल रही है। वहीं मन मुताबिक आरक्षण करा लेने का दावा करने वाले लोगों के चेहरों पर हवाइयां उड़ रही हैं। क्योंकि सबसे ज्यादा खतरा ऐसे लोगों की सीट पर ही दिख रहा है। उनके समर्थक चर्चा कर रहे हैं कि, आरक्षण अगर बदल दिया गया, तो जो उन लोगों ने तीन-टीकड़म लगाकर हरजा खर्चा किया है, उसका क्या होगा।

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