बछरावां में विगत दिनों हुई प्रसूता की मौत का मामला पकड़ रहा तूल।। Raebareli news ।।

ब्यूरो रिपोर्ट

रायबरेली: विगत दिनों बछरावां के एक निजी हास्पिटल में प्रसूता की मौत का मामला तूल पकड़ रहा है। महिला के परिजनों व डॉक्टर के बीच एक पत्रकार द्वारा करवाए जा रहे समझौते में दूसरे पत्रकार ने चैनल के नाम पर रुपयों की मांग कर डाली थी।

                      फोटो एसके इंडिया न्यूज़।

     आपको बता दें कि, खबर यूपी के रायबरेली जनपद के बछरावां की है। जहां विगत दिनों एक अस्पताल में प्रसूता की मौत का मामले को समाचार पत्रों ने प्रमुखता से छापा था। जैसा कि, आप लोग जानते हैं, पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है, तथा डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप भी मानते हैं। किंतु इस खबर से आज एक तरफ जहां पत्रकारिता की कलम शर्मसार हो रही है। तो वहीं इस पूरे मामले की वीडियो व आडियो रिकार्डिंग सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। जो जनपद में चर्चा का विषय बना हुई है।

    पूरा मामला रायबरेली के बछरावां महराजगंज रोड स्थित कल्याण सेवा संस्थान हॉस्पिटल का है। जहां पर एक महिला की डिलीवरी के दौरान मृत्यु हो जाती है। जिस पर डॉक्टर व परिजनों के मध्य विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उसी बीच दीपचंद्र मिश्रा नाम के एक वरिष्ठ पत्रकार आकर दोनों पक्षों में समझौता करवाते हैं। जिसके बाद पत्रकारिता के कलम की मर्यादा भूल जनपद के एक पत्रकार व अपने आप को ब्यूरो चीफ़ बताने वाले एक अन्य पत्रकार मौके पर आकर किसी और से नहीं बल्कि अपने साथी पत्रकार से ही मामले को लेकर रुपयों की मांग करने लगते हैं, तथा यह भी कह रहे हैं कि, वे लखनऊ से ट्रांसफर होकर यहां रायबरेली की कमान संभालने आये हैं। जबकी सच्चाई यह है कि, जिस चैनल से यह पत्रकार जुड़े है, उसमें उन्हें जुड़े हुए, अभी छह महीने भी नहीं हुए। इससे पूर्व भी ये रायबरेली में ही रहकर पत्रकारिता कर रहे थे।


    इस पूरे मामले में वायरल हुए वीडियो में मृतक के परिजनों ने भी बताया कि, दीपचंद्र मिश्रा पत्रकार ने हम लोगों से समझौता के नाम पर एक रुपए भी नहीं लिया। हालाँकि यदि परिजनों की माने तो, शुरू में डाक्टर ने पचास हजार रुपए देने की बात का लालच दे डाला था। किंतु मृतक के परिजनों ने भी हाजिर जवाब देते हुए यह कहा था कि, उनसे एक लाख रुपए ले लो, और जो महिला मृत हुई है, उसे जिंदा कर दो। अब सवाल यह उठता है कि, जब फरियादी को कहीं भी न्याय नहीं मिलता है, तो वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ बने पत्रकार का ही सहारा लेता है। किंतु यहां एक पत्रकार पीड़ित की मदद करता है, तो वहीं दूसरा पत्रकार रुपयों की लालच में अपने पत्रकार साथी पर ही दबाव बना रहा है। 

    इस पूरे मामले ने डॉक्टर व पत्रकार दोनों के ही दामन पर दाग लगा दिया है। पत्रकार द्वारा बछरावा थाने मे तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई गई है।

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