चीन की तरह जलकुंभियों ने किया गंगा के सीने पर कब्जा----
मिर्जापुर। इंसानों द्वारा लंबे समय से अंधाधुंध फाउल-गेम खेलने से प्रकुप्त हुई प्रकृति जैसे बदला लेने पर उतारू दिख रही है। सौ दिनों से ऊपर कोरोना का ऐसा जादू-टोना चल रहा है कि सबका दिमाग चकरा रहा है। कोरोना को पछाड़ने की कोशिश में शहमात का खेल चल रहा है। कभी-कभी सरकारी तंत्र कोरोना दो कदम पीछे धकेलता है तो फिर कोरोना कोई दांव ऐसा मारता है कि तंत्र चार कदम पीछे हो जाता है और वह खुद 10कदम आगे निकल जाता है। दो दिन पीछे रहने के बाद मंगलवार, 7 जुलाई को वह फिर छलांग कर गैर जिले के 3 पॉजिटिव की संख्या छोड़ दी जाए तो CMO की सूची के अनुसार 29 के पुराने रिकार्ड को छू गया। सूची में टोटल में 27 ही टाइप है। कई बार ऐसा हो गया है कि मरीजों की संख्या कुछ और जोड़ कुछ हो जा रहा है। संभव है कोरोना के चलते वर्क-लोड की वजह से ऐसा हो रहा हो।
बादल, बंधे और नदियां सब लगता है रूठी हैं- कोरोना के साथ ही आसमां भी रूठा है। कभी बिजली गिरा कर तो कभी अतिवृष्टि से सृष्टि वालों को ताकत दिखा रहा है आसमान । इससे दर्दनाक हादसे में कभी इंसान मर रहा है तो कभी जानवर मर रहे है। प्राणवायु देने वाले पेड़ भी धराशायी हो रहे हैं।
प्रकृति हुई चीन देश-प्रकृति के विविध अंग पड़ोसी देशों को कब्जा करने और तबाही मचाने सा आचरण कर रहे हैं । गंगा किनारे खड़े हो जाएं तो गंगा की निर्मलता पर जलकुंभियों का कब्जा हो गया है। लोग स्नान-ध्यान नहीं कर पा रहे हैं ।
बंधे लबालब- जिले में 24 घण्टे में 38MM पानी बरसने से ताल-तलैया ही नहीं बांध-बन्धियां चीखने लगी है कि हमे बचाना है तो स्केप गेट खोल दिया जाए । इस गेट से अनावश्यक पानी नदियों में प्रवाहित किया जाता है। इसी को देखते हुए जिले के बड़े अदवा, सिरसी, मेजा, अपर खजुरी, जरगो, अहरौरा, ढेकवा आदि बन्धों में मानक से अधिक पानी को बहाना पड़ गया है। अदवा से 2455 क्यूसेक पानी मंगलवार को निकाला गया जबकि सिरसी और मेजा का गेट 7 जुलाई को शाम 7 बजे खोलना पड़ा।
गंगा का जलस्तर- एक सेमी प्रतिघन्टे की रफ्तार से बढ़ती गंगा का जल स्तर मंगलवार की शाम 4 बजे 65.840 मीटर था जबकि सुबह 8 बजे 65.740 ही था। सोमवार को यह स्तर 65.400 ही था।
इस प्रकार प्राकृतिक तबाही के आगे इंसानी इंतजाम उजड़ते ही दिख रहे हैं।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
©कापीराइट ऐक्ट के तहत लेखन चोरी दण्डनीय हैं।
मिर्जापुर। इंसानों द्वारा लंबे समय से अंधाधुंध फाउल-गेम खेलने से प्रकुप्त हुई प्रकृति जैसे बदला लेने पर उतारू दिख रही है। सौ दिनों से ऊपर कोरोना का ऐसा जादू-टोना चल रहा है कि सबका दिमाग चकरा रहा है। कोरोना को पछाड़ने की कोशिश में शहमात का खेल चल रहा है। कभी-कभी सरकारी तंत्र कोरोना दो कदम पीछे धकेलता है तो फिर कोरोना कोई दांव ऐसा मारता है कि तंत्र चार कदम पीछे हो जाता है और वह खुद 10कदम आगे निकल जाता है। दो दिन पीछे रहने के बाद मंगलवार, 7 जुलाई को वह फिर छलांग कर गैर जिले के 3 पॉजिटिव की संख्या छोड़ दी जाए तो CMO की सूची के अनुसार 29 के पुराने रिकार्ड को छू गया। सूची में टोटल में 27 ही टाइप है। कई बार ऐसा हो गया है कि मरीजों की संख्या कुछ और जोड़ कुछ हो जा रहा है। संभव है कोरोना के चलते वर्क-लोड की वजह से ऐसा हो रहा हो।
बादल, बंधे और नदियां सब लगता है रूठी हैं- कोरोना के साथ ही आसमां भी रूठा है। कभी बिजली गिरा कर तो कभी अतिवृष्टि से सृष्टि वालों को ताकत दिखा रहा है आसमान । इससे दर्दनाक हादसे में कभी इंसान मर रहा है तो कभी जानवर मर रहे है। प्राणवायु देने वाले पेड़ भी धराशायी हो रहे हैं।
प्रकृति हुई चीन देश-प्रकृति के विविध अंग पड़ोसी देशों को कब्जा करने और तबाही मचाने सा आचरण कर रहे हैं । गंगा किनारे खड़े हो जाएं तो गंगा की निर्मलता पर जलकुंभियों का कब्जा हो गया है। लोग स्नान-ध्यान नहीं कर पा रहे हैं ।
बंधे लबालब- जिले में 24 घण्टे में 38MM पानी बरसने से ताल-तलैया ही नहीं बांध-बन्धियां चीखने लगी है कि हमे बचाना है तो स्केप गेट खोल दिया जाए । इस गेट से अनावश्यक पानी नदियों में प्रवाहित किया जाता है। इसी को देखते हुए जिले के बड़े अदवा, सिरसी, मेजा, अपर खजुरी, जरगो, अहरौरा, ढेकवा आदि बन्धों में मानक से अधिक पानी को बहाना पड़ गया है। अदवा से 2455 क्यूसेक पानी मंगलवार को निकाला गया जबकि सिरसी और मेजा का गेट 7 जुलाई को शाम 7 बजे खोलना पड़ा।
गंगा का जलस्तर- एक सेमी प्रतिघन्टे की रफ्तार से बढ़ती गंगा का जल स्तर मंगलवार की शाम 4 बजे 65.840 मीटर था जबकि सुबह 8 बजे 65.740 ही था। सोमवार को यह स्तर 65.400 ही था।
इस प्रकार प्राकृतिक तबाही के आगे इंसानी इंतजाम उजड़ते ही दिख रहे हैं।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
©कापीराइट ऐक्ट के तहत लेखन चोरी दण्डनीय हैं।





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